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वकील

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: महिलाओं वकीलों पर POSH एक्ट नहीं लागू, अलग कानून की माँग

lawbeat.in के अनुसार · 24x7 NYAYA
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: महिलाओं वकीलों पर POSH एक्ट नहीं लागू, अलग कानून की माँग
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वकीलों का रोजगार संबंध पारंपरिक नहीं होने के कारण POSH एक्ट का सामान्य अनुप्रयोग उपयुक्त नहीं है और महिलाओं वकीलों के लिये अलग नियामक ढाँचे की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति ने बारा काउंसिल ऑफ़ इंडिया और केंद्रीय तथा राज्य बार काउंसिल्स को एक विशेष ‘वकील‑विशेष’ नियमन तैयार करने का निर्देश दिया। इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट के 2013 के नियमों को उदाहरण के तौर पर लिया गया और उच्च न्यायालय तथा अन्य न्यायिक संस्थानों में भी इसका प्रावधान सुझाया गया।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

मुकदमे

तेलंगाना हाई कोर्ट ने खैरताबाद विधायक दनाम नागेंडर को अयोग्य करार दिया

तेलंगाना हाई कोर्ट ने खैरताबाद विधायक दनाम नागेंडर को अयोग्य करार दिया

हाई कोर्ट ने 23 अप्रैल, 2024 से दनाम नागेंडर को तेलंगाना विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित किया, क्योंकि उन्होंने बीआरएस टिकट पर चुने जाने के बाद कांग्रेस के तहत लोकसभा चुनाव में प्रतिस्पर्धा की थी। अदालत ने उनके वकील की अटके रहने की याचिका को खारिज कर दिया और इस आदेश की सूचना विधानसभा स्पीकर और चुनाव आयोग को भेजने का निर्देश दिया।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने 25‑साल पुराने हत्या मामले में चार की सजा रद्द, सबूत में भारी खामियां

सुप्रीम कोर्ट ने चार बचे हुए अभियुक्तों की सजा को निरस्त कर दिया, क्योंकि गवाहियों और परोक्ष सबूतों में महत्वपूर्ण अंतर थे जिससे संदेह उत्पन्न हुआ। जबकि मेडिकल रिपोर्ट से मौत हत्यात्मक साबित हुई, अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की भागीदारी को स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं कर पाया, इसलिए अदालत ने अपील स्वीकृत कर उन्हें बरी कर दिया।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

अपराध

ममता बनर्जी गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर कर पार्टी के नाम‑सिंबल फ्रीज और बागी विधायकों की अयोग्यता को चुनौती दी

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नाम और फूल‑घास प्रतीक फ्रीज कर दिया, जबकि नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन दिया, लेकिन कुछ ही घंटे बाद उनकी गिरफ्तारी हो गई। गुट ने इन घटनाक्रमों के बीच दो अलग‑अलग याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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