सुप्रीम कोर्ट ने पीएचडी पर सवाल के बावजूद सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति को बरकरार रखा, विश्वविद्यालय को पुनःजांच का आदेश

असली या नकली पीएचडी को लेकर संदेह रहने के बावजूद, सर्वोच्च न्यायालय ने यह कहा कि सहायक प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी अनिवार्य योग्यता नहीं है और अभ्यर्थी ने यूजीसी‑नेट पास कर ली थी, इसलिए नियुक्ति जारी रही। साथ ही महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय को उस डॉक्टरेट की प्रामाणिकता की नई जाँच करने का निर्देश दिया गया।
पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

