ई-पेपर

बुधवार, 5 अगस्त 2026 · दिल्ली संस्करण

पृष्ठ 1 / 7
100%
दैनिक ई-संस्करणनई दिल्ली
24x7 NYAYA — Legal News Network
न्याय ही सत्य है
बुधवार, 5 अगस्त 2026हिंदी लीगल न्यूज़ नेटवर्कमूल्य ₹0 · डिजिटल
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जीवन भर के लिए विकलांग हुए शिशु को 83 लाख का मुआवजा दिया

Live Law के अनुसार · 24x7 NYAYA
सुप्रीम कोर्ट ने जीवन भर के लिए विकलांग हुए शिशु को 83 लाख का मुआवजा दिया
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में पुरस्कार का आदेश दिया, जिसमें एक बच्चे की जीवन भर के लिए विकलांगता हो गई थी। अदालत ने भविष्य प्रभाव पर विचार करते हुए मुआवजे का निर्णय लिया।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

कानून

कुश्ती संग्राम: दो पहलवानों की अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया

कुश्ती संग्राम: दो पहलवानों की अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया

कुश्ती जगत के दो प्रमुख पहलवान बृज भूषण शरण सिंह और बजरंग पूनिया ने अदालत के हालिया फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनके बयान में अदालत के निर्णय को लेकर उनके विचार स्पष्ट होते हैं।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

संविधान

अनुच्छेद 32: संविधान की आत्मा और हृदय

डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा और हृदय क्यों कहा? इसके पीछे क्या कारण है और यह नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

वकील

अदालत परिसर में अभद्र व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत परिसर के अंदर किसी भी अशोभनीय व्यवहार पर संबंधित राज्य बार काउंसिल या बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा संज्ञान लिया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने एक वकील के खिलाफ अदालत परिसर के अंदर कथित कदाचार के लिए चेतावनी जारी की है।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

24x7nyayanews.liveपृष्ठ 1 / 7