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दिल्ली उच्च न्यायालय का साप्ताहिक समीक्षा: 29 जून से 05 जुलाई, 2026

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दिल्ली उच्च न्यायालय का साप्ताहिक समीक्षा: 29 जून से 05 जुलाई, 2026
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पहला मामला श्री धनपत राय गुप्ता बनाम श्री कश्मीरी लाल गुप्ता (मृतक) और अन्य का था, जहां अदालत ने निर्देश दिया कि केवल पहले के मौखिक पारिवारिक समझौते को दर्ज करने वाले ज्ञापन को अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है यदि यह स्वयं अचल संपत्ति में अधिकारों का निर्माण या समाप्ति नहीं करता है। दूसरा मामला ए वी. वी का था, जहां अदालत ने निर्णय दिया कि जिस स्रोत से माता-पिता अपने बच्चों के लिए छुट्टियों का खर्च उठाने का प्रस्ताव करते हैं, वह नाबालिग बच्चों की अंतरिम हिरासत का निर्धारण करते समय प्रासंगिक विचार नहीं है। तीसरा मामला सुदीप्ति हजेला बनाम इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया एवं अन्य का था, जहां अदालत ने आगामी एशियाई खेलों 2026 के लिए भारतीय ड्रेसेज टीम के चयन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

अपराध

बाढ़ का 'हमारी रचना': उच्च न्यायालय ने नागरिक निकाय को दोष देना बंद करने की सलाह दी, अवैध दुकानें और जमीन हड़पना है समस्या

बाढ़ का 'हमारी रचना': उच्च न्यायालय ने नागरिक निकाय को दोष देना बंद करने की सलाह दी, अवैध दुकानें और जमीन हड़पना है समस्या

मुंबई के क्रोनिक जलभराव के लिए नागरिकों के कारणों को जिम्मेदार मानने की बात कही गई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अवैध दुकानें और जमीन हड़पना जलभराव के मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

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लोक अदालत में चेक बाउंस के 4.20 लाख के विवाद का सहमति से समाधान

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत में शिकायत वाद संख्या 405/2023 के आधार पर चेक बाउंस से जुड़े विवाद का समाधान सहमति से किया गया जिसमें 4 लाख 20 हजार रुपये के लेनदेन शामिल थे।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

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सुप्रीम कोर्ट में केस निपटाने के लिए जल्द भेजें ऑनलाइन आवेदन

सर्वोच्च न्यायालय में समाधान समारोह-2026 के तहत लगातार लंबित मामलों का निपटारा सहमति, संवाद और मध्यस्थता से हो रहा है। आवेदन 31 जुलाई तक ऑनलाइन कर सकते हैं।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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