मृत संयुक्त डिक्रीधारक का नाम निष्पादन अर्जी में होने से पूरी कार्यवाही शून्य नहीं हो जाती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि संयुक्त डिक्रीधारकों में से किसी एक की मृत्यु निष्पादन की अर्जी दाखिल होने से पहले हो गई हो, लेकिन जीवित संयुक्त डिक्रीधारक पूरी डिक्री के निष्पादन का कानूनी अधिकार रखता हो, तो केवल मृत व्यक्ति का नाम अर्जी में बने रहने से पूरी निष्पादन कार्यवाही शून्य नहीं हो जाती। ऐसी स्थिति में मृत डिक्रीधारक का नाम हटाना या पक्षकारों के विवरण को दुरुस्त करना प्रक्रियात्मक सुधार माना जा सकता है। जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इस सवाल का फैसला केवल यह देखकर नहीं किया जा सकता कि निष्पादन अर्जी दाखिल

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि संयुक्त डिक्रीधारकों में से किसी एक की मृत्यु निष्पादन की अर्जी दाखिल होने से पहले हो गई हो, लेकिन जीवित संयुक्त डिक्रीधारक पूरी डिक्री के निष्पादन का कानूनी अधिकार रखता हो, तो केवल मृत व्यक्ति का नाम अर्जी में बने रहने से पूरी निष्पादन कार्यवाही शून्य नहीं हो जाती। ऐसी स्थिति में मृत डिक्रीधारक का नाम हटाना या पक्षकारों के विवरण को दुरुस्त करना प्रक्रियात्मक सुधार माना जा सकता है। जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इस सवाल का फैसला केवल यह देखकर नहीं किया जा सकता कि निष्पादन अर्जी दाखिल
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